अवधू भजन भेद है न्यारा भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
मात पिता मिल जायेंगे ,लख चौरासी माय।
गुरु सेवा और बंदगी ,फेर मिलन की नाय।

अवधू भजन भेद है न्यारा।

क्या गावे क्या लिख बतलाये ,
क्या भरम संसारा।
क्या संध्या तर्पण कीन्हे ,
जो नहीं तत्त विचारा।
अवधू ….

मूढ़ मुढ़ाये सिर जटा रखाये ,
क्या तन लाये छारा।
क्या पूजा पावन की कीन्हे ,
क्या फल किये अहारा।
अवधू ….

बिन परिचे साहेब होई बैठे ,
विषय करे व्यापारा।
ज्ञान ध्यान का मर्म न जाने ,
बात करे अहंकारा।
अवधू ….

अगम अयाह माया अति गहरा ,
बीज न खेत निवारा।
माया सो ध्यान मगन हो बैठे ,
काट करम की छारा।
अवधू ….

जिनके सदा अहार अंतर में ,
केवल तत्त विचारा।
कहे कबीर सुनो हो गोरख ,
तारा सहित परिवारा।
अवधू ….

kabir bhajan video hindi

अवधू भजन भेद है न्यारा Avadhu Bhajan Bhed Hai Nyara संत कबीर भजन हिंदी
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भजन :- अवधू भजन भेद है न्यारा
गायक :- राजीव मेहरा

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