उभी मैं सरवर तीर भजन लिरिक्स

॥ दोहा ॥
प्रीतम प्रीत लगाय के , तुम दूर देशमत जाय ।
बसो हमारी नगरी में , पिया हम मांगे तुमखाय ॥

ब्रहणी बैठी पीहर में ,
पियो बसे परदेश ।
खान पान सब त्यागिया रे ,
त्यागिया वस्त्र वेश पियाजी ,
उभी मैं सरवर तीर ।
नैणां सूं ढलक्यो नीर पियाजी ,
उभी मैं सरवर तीर ॥

धूणी धूखे ज्यूं काळजो रे ,
जळ जळ गयो रे शरीर ।
मछली ज्यूं तड़फत फिरूं रे ,
कद होसी समदर सीर पियाजी ,
उभी मैं सरवर तीर ॥
नैणां सूं ढलक्यो । ….

सूता नी आवे नींदड़ी रे ,
जागू तो नहींरे सुहाय ।
विरह काले नाग ज्यू रे ,
काढ काळजो खाय सजन म्हारा ,
उभी मैं सरवर तीर ॥
नैणां सूं ढलक्यो । ….

बेदरदी पिया दया नहीं आई रे ,
विरह गयो रे लगाय ।
कयो चरणों रे माँय राखसु जी ,
अध बिच दीवी छिटकाय पियाजी ,
उभी मैं सरवर तीर ॥
नैणां सूं ढलक्यो । ….

रूपस्वरूप आपरो है ,
ज्यां ने झुर रही ब्रहणी अनेक ।
सिमरत दासी ‘ आपरी रे ,
अरे दया हमारी देख सजन म्हारा ,
उभी मैं सरवर तीर ।
नैणां सूं ढलक्यो । ….

श्याम दास वैष्णव के भजन video

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भजन :- उभी मैं सरवर तीर
गायक :- श्याम दास वैष्णव

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