कायर सके ना झेल फकीरी अलबेला रो खेल भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
हरी भजे वे सुरवा , नहीं कायर को काम।
कायर नर का क्या मता काम क्रोध का ध्यान।

कायर सके ना झेल ,
फकीरी अलबेला रो खेल।

ज्यूँ रण माँय लडे नर सूरा,
अणियाँ झुक रया सेल।
गोली नाल जुजर बा चालै,
सन्मुख लेवै झेल।
फकीरी अलबेला रो खेल।
कायर सके ….

सती पति संग नी सरी,
अपने पिया के गैल।
सुरत लगी अपने साहिब से ,
अग्नि काया बिच मेल।
फकीरी अलबेला रो खेल।
कायर सके ….

अलल पक्षी ज्यूँ उलटा चाले ,
बांस भरत नट खेल।
मेरु इक्कीस छेद गढ़ बंका ,
चढ़गी अगम के महल।
फकीरी अलबेला रो खेल।
कायर सके ….

दो और एक रवे नहीं दूजा,
आप आप को खेल।
कहे सामर्थ कोई असल पिछाणै,
लेवै गरीबी झेल।
फकीरी अलबेला रो खेल।
कायर सके ….

sanwarmal saini ke bhajan video

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कायर सके ना झेल फकीरी अलबेला रो खेल भजन लिरिक्स in Hindi
भजन :- कायर सके ना झेल फकीरी
गायक :- सांवरमल सैनी

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