काया ने सिणगार कोयलियाँ भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
तू तो बड़भागिनी , कौन तपस्या किन।
तीन लोक तारण तिरण , सो है तेरे आधीन।।

काया ने सिणगार कोयलियाँ ,
पर मण्डली मत जाइजो ए ।
पर मण्डलीरा नहींरे भरोसा ,
अध बिच में रूळ जावो ए ।
काया ने सिणगार कोयलियाँ ,
ओं ओं हरिओम ।।

गहरो फूल रोहिड़ा रो कहिजे ,
वे फुलड़ा मत लाइजो ए ।
थोड़ा फूल घणां कर मानो ,
फूल हंजारी गुल लाइजो ए ।।
काया ने सिणगार। ….

खारे समदरो खारो पाणी ,
वो पाणी मत लाइजो ए ।
थोड़ो नीर घणो कर मानो ,
नीर गंगा जळ लाइजो ए ।
काया ने सिणगार। ….

पिछम भोम में उभो खेजड़ो ,
उण छाया मत जाइजो ए ।
उत्तर – दखण रो बाजे बायरो ,
काँटा में रूळ जावो ए ।
काया ने सिणगार। ….

बाई मीरां री भजन मण्डली ,
उण मण्डली भल जाइजो ए ।
उण मंडली रा खरा रे भरासा ,
डूबतड़ी तिर जावो ए ॥
काया ने सिणगार। ….

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