काया सुनी सुनी लागे मारा गुरासा बिना भजन लिरिक्स

काया सुनी सुनी लागे,
मारा गुरासा बिना,
गुरासा बिना सत गुरासा बिना,
गुरासा बिना सत गुरासा बिना,
काया सुनी सुनी लागें,
मारा गुरासा बिना।।

मन्दिर महल भवन सब सुना,
दीपक ज्योत बिना,
ग्यान बिना यो ह्रदय सुना,
धरती ईन्दर बिना,
काया सुनी सुनी लागें,
मारा गुरासा बिना।।

माल खजाना दोलत सुना,
ये सब धर्म बिना,
अरे पुत्र बिना परिवार हैं सुना,
या चिडिया घर बिना,
काया सुनी सुनी लागें,
मारा गुरासा बिना।।

मोटर गाङी इंजन सुना,
ये सब तेल बिना,
वेद बिना ब्रामण हे सुना,
यो हाथी दांत बिना,
काया सुनी सुनी लागें,
मारा गुरासा बिना।।

हंस बिना सरवरीया सुना,
ये घोङा जिण बिना,
अरे नाव तो केवट बिन सुनी,
यो केवटी राम बिना,
काया सुनी सुनी लागें,
मारा गुरासा बिना।।

माया तो मनका बिन सुनी,
या भक्ति भाव बिना,
हरी भजन तो कर ले हजारी,
अरे लालच लोभ बिना,
काया सुनी सुनी लागें,
मारा गुरासा बिना।।

काया सुनी सुनी लागे,
मारा गुरासा बिना,
गुरासा बिना सत गुरासा बिना,
गुरासा बिना सत गुरासा बिना,
काया सुनी सुनी लागें,
मारा गुरासा बिना।।

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