किना क्यू नही बृज रा मोर भजन लिरिक्स

॥ दोहा ॥
सोरठ तब ही छेड़िये , जब चोपो पड़ जाय ।
चतुर बेण उठ सुणे है , मूरख नींद घुराय ॥

कीना क्यूं नहीं ब्रज रा मोर ,
कीना क्यूं नहीं ब्रज रा मोर ।
उधव म्हाने ,
कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥

ब्रज में रेवता सांवरा वन फल खाता ।
उड़ता पंख मरोड़ ,
उधव म्हाने ,कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥

उमड़ घुमड़ कर आई रे बदरिया रे ।
घटा छाई घन घोर ,
उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ।।

दादुर मोर पपीहा बोले रे ।
कोयल करत किलोर ,
उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥

माता यशोदा चुगो चुगाती रे ।
गहरा बोले नंद जी री पोल ,
उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥

पाँख गिरे ने म्हारी कृष्ण उठावे रे ।
टांकत नन्द किशोर ,
उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ।।

बाई मीरां ‘ कहे प्रभु ,
गिरधर रा गुण रे ।
मरूधर नगर कठोर ,
उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर

श्याम दास वैष्णव भजन video

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भजन :- कीना क्यूं नहीं ब्रज रा मोर
गायक :- श्याम दास वैष्णव

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