किसी नींद लगी कंगाल को सो गया सपन पाया है भजन लिरिक्स

किसी नींद लगी कंगाल को सो गया सपन पाया है।

(1) भूखन मरता जनम भिखारी।
सपने में भई सम्पति भारी।
हुक्म किया सज गई सवारी।
रथ, गज, घोडा, पालकी घर अरब खरब भाया है।।
किसी नींद लगी कंगाल को सो गया सपन पाया है

(2) घर में रानी चन्द्र मुखी है।
नाती बेटा सर्व सुखी है।
मार के वैरी करे दुःखी है।
सब राजन पर मालकी ऐसा अटल राज पाया है।
किसी नींद लगी कंगाल को सो गया सपन पाया है

(3) सपने में वर्ष हजारों बीते।
बड़े-बड़े वली युद्ध में जीते।
चलें तोप और बड़े पलीते।
मारग स्वर्ग पाताल में वहाँ छत्तर की छाया है।
किसी नींद लगी कंगाल को सो गया सपन पाया है

(4) खूटी आँख गई प्रभुताई।
टूटी छान नजर जब आई।
भूलेदास छन्द कथि गाई।
पगड़ी सोलह साल की सठ जाग के पछताया है।
किसी नींद लगी कंगाल को सो गया सपन पाया है

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