कुन तो लाया तुमडा कुण तो नागर बेल भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
संत समागम हरि कथा , तुलसी दुर्लभ दोय।
सूत धारा और लक्मी , बीरा पापी के घर होई।

कुण तो लाया तुम्बड़ा ,
कुन तो नागर बेल।
कुण तो लाया रे ,
संता री अमर भेल।

शिव जी लाया तुम्बड़ा ,
पारवता नागर बेल ,
गोरख जी लाया ,
संता री अमर भेल।

किन ने देवा तुम्बड़ा ,
कुन ने नागर बेल।
कुन ने तो देवा वो ,
संता री अमर भेल।

शिव जी देवा तुम्बड़ा ,
पारवता नागर बेल।
भरतरी ले ली वो ,
संता री अमर भेल।

कठे भुवावा तुम्बड़ा ,
कठे नागर बेल।
कठे तो भुवावा ,
संतों री अमर भेल।

बाड़ी भुवावु तुम्बड़ा ,
बगीचा नागर बेल।
भजना में भुवावा ,
संता री अमर भेल।

कुण जी लाया तुम्बड़ा ,
कुन तो नागर बेल।
कुण तो लाया रे ,
संता री अमर भेल।

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