गुणती खोले ने बारे काढ रे बिणजारा भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
भक्त बीज पलटे नहीं , जो जुग जाय अनन्त ।
ऊंच नीच घर अवतरे , वो रहे संत को सन्त ।

गुणती खोले ने बारे काढ रे बिणजारा ,
राम रे भजवारी वेळा जाय ।
गुणती खोलूं तो धोखो उपजे मेलागर ,
लारे आवे रे थारे वार ॥

वार करणिया लारे रह गया बिणजारा ,
गया है वे गंगाजी रे घाट ।
हँस ने मुलके ने मुडे बोलजे मेलागण ,
हिवड़े पेरावू नवसर हार ॥

ऊंची बेड़ावू वादळ महल में मेलागर ,
चुड़लो पेरावू हस्ती दाँत ।
थारे जेड़ा रे हाळी बाळदी बिणजारा ,
नोखता घोड़लियों वाली लाद ।

सेर – सेर सोनो मैं तो पहरती बिणजारा ,
मरती मोतिड़ां भारो भार ।
सोना रा पालणा में हीडती बिणजारा ,
दासियाँ ढोलती रे वाव ॥

मत कर धनवन्ती धन रो गाड रे बिणजारा ,
नहीं रे आवेला थारे काम ।
घड़ियक झोलो वाजियो बिणजारा ,
होगी मैं घर – घर री पणिहार ॥

अब तो बिणजारा री बोली छोड़ दे मेलागर ,
खोमद के ने बतलाव ।
शायर नीर सरीखा दीकरा बिणजारा ,
चनण सरीखा भरतार ॥

कोई छत्रि वे तो सांभलो रे भाइड़ा ,
बिणजारे पकड़ी अठे गाय ।
झड़जाई फुलड़ा ने रह जाई वासना जुगमें ,
वेला सतियों रो अमर नाम ।

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भजन :- गुणती खोले ने बिणजारा
गायक :- प्रकाश माली

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