घर में रागी घर में वैरागी भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
तुलसी इस संसार में, भांति भांति के लोग।
सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग।

घर में रागी घर में वैरागी,
घर घर गावन वाला।
कलयुग री आ छाया पड़ी है ,
कुण नुगरो ने वर्जन वाला।

गुरु मुख ज्ञानी जगत में थोड़ा,
मन मुख मुंड कियोड़ा रे।
ज्ञान गति री मति नही जाने ,
बन बैठा पुरुष दीवाना ओ जी
घर में रागी …..

नावे धोवे तिलक लगावे ,
नित् मंदिर जावण वाला ओ।
निज मन्दिर री गति नही जाने,
गले जनेऊ री माला ओ जी।
घर में रागी …..

वेश पेर भगवान् रिजावे ,
घरे जोगियो रा वाना ओ।
नेती धोती री खबर नही जाने ,
लम्बे बालो वाळा ओ जी।
घर में रागी …..

बाल राख ने मोड़ा चाले ,
पंच केश नही ध्याता रे ।
पांच तत्व री सार नही जाने,
नित निम् नहवाण वाला ओ जी।
घर में रागी …..

भुरनाथ अडवन्का जोगी,
सिद काजल वसवाला।
गुरु कानजी सिमरत मिलिया,
फेरे थोरी माला ओ जी।

घर में रागी घर में वैरागी,
घर घर गावन वाला ओ।
कलयुग री आ छाया पड़ी है
कुन नुगरोने वर्जन वाला ओ जी ।

जोग भारती के भजन video

घर में रागी घर में वैरागी Ghar Main Ragi Ghar Main Vairagi rajasthani chetawani bhajan lyrics
मारवाड़ी चेतावनी भजन लिरिक्स
भजन :- घर में रागी घर में वैरागी
गायक :- जोग भारती

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