चल हंसा सतलोक हमारे भजन लिरिक्स

।। दोहा।।
तुलसी नर का क्या बड़ा ,समय बड़ा बलवान।
काबा लूटी गोपिया , वही अर्जुन वही बाण।

चल हंसा सतलोक हमारे ,
छोडो यह संसारा हो।

यही संसार काल है राजा ,
करम को जाल पसारा हो।
चौदह खंड बसे जाके मुख ,
सब को करत अहारा हो।
चल हंसा ….

जारि बारी कोयला कर डारत ,
फिर फिर दे ओतारा हो।
ब्रह्मा विष्णु शिव तन धरी आये ,
और को को कौन बिचारा हो।
चल हंसा ….

सुर नर मुनि सब छल छल मारण ,
चौरासी में डारा हो।
मध्य आकाश आप जहा बैठे ,
ज्योति सबद उजियारा हो।
चल हंसा ….

सेत सरूप सबद जहा फुले ,
हंसा करत बिहारा हो।
कोटिन सुर चंद छिपी जहा ,
एक रोम उजियारा हो।
चल हंसा ….

वही पार एक नगर बसत है ,
बरसत अमृत धारा हो।
कहे कबीर सुनो धर्मदासा ,
लखो पुरुष दरबारा हो।
चल हंसा ….

चेतावनी भजन लिरिक्स video | anil jangda bhajan video

चल हंसा सतलोक हमारे chal hansa satlok hamare bhajan संत कबीर दास का भजन
संत कबीर दास का भजन Hindi lyrics
भजन :- चल हंसा सतलोक हमारे
गायक:- अनिल जांगड़ा

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