चाकर हूँ चरणा रो पिरजी एड़ी भूल कई राको

चाकर हूँ चरणा रो पिरजी,
एड़ी भूल कई राको ई,
रात दिन आ दिन ही रात को,
अरे बेडी बन्दी धनियारा अन्नदाता,
आ चरना कर थरोई।।

सरस्वती मात शारदा सिवरू,
हिरेदे उजालो लोई थाकोई,
रिद्धि सिद्धि रा भंडार खोलदो,
अरे कमि काई जी राको अंदाता,
आ चरना कर थरोई।।

सोहनी दुवारका ये देव पधारिया,
भालो करियो नवरकोई,
ये अजमल जी री आशा पुरदी,
अरे बाल जीवायो सुगना को,
आ चरना कर थरोई।।

ये बड़ा बिरम दे चोटा रामदे,
जोड़ो बन्यो भाई रकोइ ई,
ये माता मेनादे करे आरती,
माता मेनादे अरे कलश बंधायो,
धनयरो अंधता आ चरना कर थकोई।।

सती द्रोपती रो ये चिरी बंदयो,
आंबे लगायो भंद्वकोई,
नेनी बई रो बरयो महायरो,
अर्जुन रथडा हाँको अंदाता,
आ चरनो कर थकोई।।

ये गजरी पुकारी ये सुनी दरबा में,
नेवरे हजारी धकोई,
ये रिद्धि ओ बेटो भजन माए बोले,
अरे अवा जीवन कई राको अंधता,
आ चरनो कर थकोई।।

चाकर हूँ चरणा रो पिरजी,
एड़ी भूल कई राको ई,
रात दिन आ दिन ही रात को,
अरे बेडी बन्दी धनियारा अन्नदाता,
आ चरना कर थरोई।।

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