चाल सखी सत्संग में चला भजन लिरिक्स | chal sakhi satsang me chala bhajan lyrics

।। दोहा ।।
कौन जगत में हस रहा ,कौन जगत में रोय।
पाप जगत में हस रहा ,और धर्म रजगत में रोय।

चाल सखी सत्संग में चाला ,
सत्संग मे सतगूरू आसी।
हरी चरणों की होजा दीवानी ,
नई तो जुगड़ा मे बह जासी।

ब्रह्मा जी आसी वीष्णु भी आसी ,
शंकर आसी केलासी।
छोटो सो गणपति आसी ,
माँ गोरा ने संग लासी।
चाल सखी ….

राम भी आसी लक्मण आसी ,
मधुवन का वनवासी।
हनुमान सा पायक आसी ,
माँ सीता संग में लासी।
चाल सखी ….

घड़ी घड़ी मे भरजे बराबर ,
पलक पलक मे जग जासी।
एक घड़ी सत्संगत करले ,
कट जासी लक चौरासी।
चाल सखी ….

गणेश आसी न रिधी सिधी लासी ,
माँ गोरा ने संग लासी।
दशरथ जी के दो कवर लाडले ,
वे तो वन के वनवासी।
चाल सखी ….

हरी की सेवा गुरु चरण में ,
बनत बनत बीरा बन जासी।
मीठा राम सत संगत शरणे ,
कर भजन नर तीर जासी।
चाल सखी ….

रामकुमार मालुनी के भजन video

चाल सखी सत्संग में चला chal sakhi satsang me chala satguru ji ke bhajan रामकुमार मालुनी के भजन
सतगुरु भजन लिरिक्स इन हिंदी
भजन :- चाल सखी सत्संग में चाला
गायक :- रामकुमार मालुणी

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