चेला वही चीज लाना रे गुरु ने मंगाई भजन लिरिक्स

चेला वही चीज लाना रे ,
गुरु ने मंगाई।
चेला वही चीज लाना रे ,
गुरु ने मंगाई।

पहली भिक्षा आटा लाना
गांव नगर के पास ने जाना।
जी चलती चक्की चख के आना।
जोली तो भर के लाना मेरे चेला रे,
गुरु ने मंगाई।
चेला वही …..

अरे दूजी भिक्षा जल की लाना।
कुआ बावड़ी के पास ने जाना।
ऐ खारा मीठा देख के लाना।
ऐ तुम्बी तो भर कर , लाना मेरे चेला रे ,
गुरु ने मंगाई।
चेला वही …..

तीजी भिक्षा मांस की लाना।
जीव जंतु को नहीं सताना।
ऐ जिन्दा मुर्दा देख के लाना।
ऐ खप्पर भर कर, लाना मेरे चेला रे,
गुरु ने मंगाई।
चेला वही …..

चौथी भिक्षा लकड़ी की लाना।
वन राय को नहीं सताना।
भारी बनाकर , लाना मेरे चेला रे,
गुरु ने मंगाई।
चेला वही …..

केवे मखंदर सुन जदी गोरख।
ये पथ है निर्वाणा।
इण पदा री करे खोजना।
वो नर चतुर, सुजाना मेरे चेला रे
गुरु ने मंगाई।
चेला वही …..

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