जबरा जंगल में बैठी माता आवरा भजन लिरिक्स

जबरा जंगल में बैठी आवरा।
जग जननी जनम सुधार।
राठोडा कुल मजेदार ,
लीनो अवतार। २।

मंदिर बनियो बिच पहाड़ ,
लागे सोभा अनंत अपार।
सामे सरवर लम्बी पाल ,
पिछवाड़े बाजार।

सामे तो मूरत लागे सोवनी ,
सुन्दर पुष्पा रो श्रृंगार।
साडी सुरंगी लचदार ,
जड़िया जरकस तार।

शंख सेवा में विष्णु पुरियो ,
ब्रह्मा चारो वेद उचार ।
करे रे ध्यान त्रिपुरार ,
थारे दरबार।

52 भेरू ने चौसठ जोगणीया ,
निश दिन गावे मंगला चार।
भक्तो री भीड़ अपार ,
थारे दरबार।

दुखिया रा दुःख माँ पल में मेट दो ,
जननी दया दृस्टि धार।
मरता प्राणी रो प्राण उभार ,
नाव डूबी जाय।

स्वर्ण मुखुत सोवे शीश पर ,
केशर कुमकुम तिलक ललाट।
चढ़े मिष्ठान भर भर थाल ,
ना ना प्रकार।

नाहर ओढे बोले मोरिया ,
बोले कोयल राग मिलाय।
शंख सेहेनाइ बाजे लार ,
जालर री झंकार।

भक्ति बजरी चेन राम को ,
शिव शक्ति को आधार।
नाना शम्भू है बंसी लाल ,
गावे बारम्बार।

जबरा जंगल में बैठी आवरा।
जग जननी जनम सुधार।
राठोडा कुल मजेदार ,
लीनो अवतार। २।

जबरा जंगल में बैठी माता आवरा भजन लिरिक्स jabra jangal mein bethi awara mata ji bhajan Lyrics. avari mata lavani bhajan

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