जय हो कामदगिरि सरकार चहुँ दिश गूँज रही तेरी जयकार

चहुँ दिश गूँज रही तेरी जयकार,
जय हो कामदगिरि सरकार,
जय हो कामदगिरी सरकार।।

सुरसरि धार नाम मन्दाकिनी,
जो सब पातक पोतक डाकिनी,
ऋषि और मुनि सब करते जयकार,
जय हो कामदगिरी सरकार।।

कामद भे गिरि रामप्रसादा,
अवलोकत अप हरत विषादा,
सुनते हैं प्रभु यहाँ सब की पुकार,
जय हो कामदगिरी सरकार।।

शैल हिमांचल आदिक जेते,
चित्रकूट जशु गावहिं तेते,
विंध्य मुदित मन सुख न समाई,
श्रमबिनु विपुल बड़ाई पाई,
त्रेतायुग से हो रही है तेरी जयकार,
जय हो कामदगिरी सरकार।।

चहुँ दिश गूँज रही तेरी जयकार,
जय हो कामदगिरि सरकार,
जय हो कामदगिरी सरकार।।

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