जीवन समर्पित कर रहा मैं तुमको दीनानाथ भजन लिरिक्स

जीवन समर्पित कर रहा मैं तुमको दीनानाथ है।
डुबाना या तारना अब आपके ही हाथ है।।

सरबस लुटा बैठा हूँ मैं तेरे लिए करतार है।
बिन आपके नैया मेरी का कोई न खेबन हार है।।

मजधार में नैया हिलोरें ले रही सरकार है।
इस जहाँ में आप बिन कोई नहीं आधार है।।

दे दो सहारा तनिक सा देर क्यों कर कर रहे।
भूल जो मुझसे हुई उसे माँफ क्यों नहीं कर रहे।।

सागर दया के आप हैं मैं दीनता दिखला रहा।
ऐसे निठुर क्यों बन रहे थोड़ा तरस नहीं आ रहा।।

मेरा न कुछ बिगड़े प्रभुलज्जा तुम्हारी जायेगी।
पतित पावन आपको दुनियाँ नहीं बतलायेगी।

सर पर रख हाथ कह दो छोड़ तो नहीं जाओगे।
दर तुम्हारा है सलौना और कहाँ भिजवाओगे।।

अगर न पकड़ी वाँह मेरी दर पर ही मर जाऊँगा।
महावीर नवका पार कर दो मैं कहीं नहीं जाऊँगा।।

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