जोबन धन पावणा दिन चारा लिरिक्स

॥ दोहा ॥
निवण बड़ी संसार में , नहीं निवे सो नीच ।
निवे नदी रो गूंदलो , भाई रे वे नदी रे बीच ॥

गरब करे सो गंवारा
जोबन धन , पावणा दिन चारा ॥

हाड़ माँस का बण्या पूतला ,
भीतर भरिया भंगारा ।
ऊपर रंग सुरंग चढ़ायो ,
कारीगर किरतारा ,
जोबन धन , पांवणा दिन चारा ॥

पशु चाम की बणत पनइया ,
नौबत बणे रे नगारा ।
नर थारी चाम काम नहीं आवे ,
बळ जळ होवे रे अंगारा ,
जोबन धन , पांवणा दिन चारा ॥

दस माथा और बीस भुजा हा ,
पुत्र घणा ओ परिवारा ।
एडा – एडा जोध गरब में गळिया ,
लंकारा सिरदारा ,
जोबन धन , पांवणा दिन चारा ॥

ओ संसार ओस वाळो पाणी ,
जाता नहीं लागे वारा ।
कहत कबीर सुणो भाई साधो !
हरी भज उतरो पारा ,
जोबन धन , पांवणा दिन चारा

rajkumar swami ke bhajan Video

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भजन :- जोबन धन पावणा दिन चारा
गायक :- राजकुमार स्वामी

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