तेरे दया धर्म नहीं मन में मुखड़ा क्या देखे दर्पण में भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
दया धरम का मूल है, और पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया ने छोडियो , जब तक गठ में प्राण।

तेरे दया धर्म नहीं मन में ,
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।

कागज की एक नाव बनाई,
छोड़ी गहरा जल में।
धर्मी कर्मी पार उतर गया,
पापी डूबे जल में।
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।
तेरे दया धर्म …..

पेच बांधकर बांधे पगड़ी,
तेल लगावे जुल्फन में।
इण ताली पर घास उगेला,
ढोर चरेली बन मे।
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।
तेरे दया धर्म …..

आम की डाली कोयल राजी,
सुआ राजी वन में।
घरवाली तो घर में राजी,
संत राजी वन में।
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।
तेरे दया धर्म …..

मोटा मोटा कड़ा पहने,
कान बिदावे तन में।
इण काया री माटी होवेला,
सो सी बीच आंगन में।
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।
तेरे दया धर्म …..

कोडी कोडी माया जोड़ी,
जोड़ रखी बर्तन में।
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
रेवे मन री मन में।
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।

तेरे दया धर्म नहीं मन में ,
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।

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तेरे दया धर्म नहीं मन में मुखड़ा क्या देखे दर्पण में mukhda kya dekhe darpan mein chetawani bhajan lyrics in hindi
मारवाड़ी चेतावनी भजन लिरिक्स
भजन :- तेरे दया धर्म नहीं मन में
गायक :- अनिल नागोरी

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