थारा उड़ गया केश काला डोकरिया कद फेरेलो माला भजन

।। दोहा ।।
नींद निसाणी मोत की , जागो जपो मुरार।
एक दिन सोणा होवसी , लम्बे पांव पसार।

थारा उड़ गया केश काला रे डोकरा ,
अब कद फेरेला थू माला।

सूजे नहीं अब पड़े भाड़ में ,
करे मजाकों वाला।
अरे घर की लुगाई थारो केणो नी माने ,
उठे जीव में उकाला।
थारा उड़ गया। …..

बूढ़ो हुवो ने अब लकड़ी ली दी ,
थारा धूजण लागा डाला।
अरे मुखड़ा री सोभा दात पड़िया ,
खाली रह गया आला।
थारा उड़ गया। …..

माया रो मोह छोड़ ने राखे ,
देवे पेटियों रे ताला।
अरे गाड़ी घोडा काम नी आवे ,
जाणो पड़ सी पाला।
थारा उड़ गया। …..

बेटा ने परणाय बुलायो ,
अब घर बिंदनियो रा हाला।
कद मरेलो यो डोकरा डाकी ,
फितर ही फेरे माला।
थारा उड़ गया। …..

थारा उड़ गया केश काला रे डोकरा ,
अब कद फेरेला थू माला।

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