थारी लंका सुनी होगी रे कटे गयो मारो कंठ भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
राम नाम भज्यो नहीं , कियो ने हरि से हेत।
वो नर ऐसे जायेगा , ज्यू मूली का खेत।

थारी लंका सुनी हो गई ,
कठे परो ग्यो कन्थ। २।
कथे परो ग्यो कन्थ ,
मारा पीव बड़ा बलवंत।
थारी लंका। ….

सोना में सुगंध भर दूंगा ,
धुआँ अंगनि से बंद कर दूंगा।
सीडी बनाऊ नभ के ऊपर ,
ने उचो काडू पंख।
थारे मन की मन रह गई ,
कठे परो ग्यो कन्थ।
थारी लंका। ….

सोना का थारे कोट कांगरा ,
बणिया कई लाख लाख रा।
या पे कूद रिया रीछ बांदरा ,
तू धरती पे पोडंक।
थारी गजा एंकर ले गई।
कठे परो ग्यो कन्थ।
थारी लंका। ….

सात समुन्द्र और नो खाई ,
कुम्भकर्ण बलवंता भाई।
मेघनाथ का पुत्र कहाई ,
सब को आग्यो अंत।
थारी किस्मत जोलो खागई ,
कठे परो ग्यो कन्थ।
थारी लंका। ….

सिया चुरा कर तू लाया ,
लंका का राज विभीषण पाया।
कहे मोहन तुझे मार गिराया ,
मारो ऐसो है भगवंत।
थारी उल्टी गंगा बह गई ,
कठे परो ग्यो कन्थ।
थारी लंका। ….

थारी लंका सुनी हो गई ,
कठे परो ग्यो कन्थ। २।
कथे परो ग्यो कन्थ ,
मारा पीव बड़ा बलवंत।
थारी लंका। ….

थारी लंका सुनी होगी रे कटे गयो मारो कंठ भजन लिरिक्स thari lanka suni hogi re anwar chacha ke bhajan hindi lyrics

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