दलाली हीरा लालन की भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
सतगुरु आवत देखिया , ज्यारे कांधे लाल बंदूक ।
गोळी दागी हरी नाम री , भाग गया जमदूत ।

म्हारा सतगुरु दीवी रे बताय ,
दलाली हीरा लालन की ।

लालि लाली सब कहे रे ,
सबके पल्ले लाल ।
गाँठ खोल परखी नहीं रे ,
इण विध भयो रे कंगाल ।
दलाली हीरा लालन की ।
म्हारा सतगुरु दीवी ……

लाल पड़ी मैदान में रे ,
खलकउ लाघ्यो जाय ।
नुगरे ठोकर मार दीनी ,
सुगरे तो लीवी रे उठाय ।।
दलाली हीरा लालन की ।
म्हारा सतगुरु दीवी ……

इधर से अंधा आविया ,
उधर से अंधा जाय ।
आंधा से आंधा मिले रे ,
मारग कुण तो बताय ॥
दलाली हीरा लालन की ।
म्हारा सतगुरु दीवी ……

माखी बैठी शहद पर रे ,
पंखुडियाँ लिपटाय ।
उड़ने रा सांसा पड़े रे ,
लालच बुरी रे बलाय ॥
दलाली हीरा लालन की ।
म्हारा सतगुरु दीवी ……

लाली लालि सब केवे रे ,
लाली लखीन जाय ।
लाली लखी रे दास कबीरा ,
आवा रे गमन मिट जाय ।
दलाली हीरा लालन की ।
म्हारा सतगुरु दीवी ……

दलाली हीरा लालन की. dalali hira lalan ki .satguru bhajan. prakash mali bhajan.

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