धर धारू रे पाँव धराणा रे भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
रुनिचे रा राजवी , आवो धारू रे अरदास।
जमो जगावा थारे नाम रो, पुरो भक्ता री आस।

धर धारू रे पाँव धराणा रे ,
जाए पाप ने धर्म थपोना।
गुरु उगमजी पाट विराजिया,
दर्शन हरी रा करना।
रावलजी ने केवे राज पद्मनी रे ,
मेर किया कर मानो।
मानोतर केवे मानो,
थी समजे समजे हालो,
थी डोर धर्म री ढालों,
थी जद अमरापुर मालो गुरूजी रे।

निवन प्रणाम गुरूजी ने कीजे रे ,
हरी मिलावे तो मिलना।
आड़ा अबका घाट घडिजे ,
किन वित पार उतरना।
थारू ने केवे बाई रूपादे रे ,
आवो धर्म रा वीर हमारा रे ,
बाई रूपा रो धर्म निभाना।
घडी एक पोडो पलंग हमारा ,
जमला माय जाना।
वाचक ने केवे बाई रूपादे रे ,
केणो बाई रो करना।
भाई रो धर्म निभाना ,
थी उत्तर मालजी में देना ,
थी धर्म रा वीर हमारा ,
जमला में म्हारे जाना गुरूजी रे।

केवे तातो बैन हमारी रे ,
नेचो मन में धरना।
सत्संग में थी जायेंने आवो ,
घनी देर नही करना।
रूपा दे ने केवे भाई धर्म रो रे ,
रुमझुम रुमझुम झांझर वाजिया रे ,
चौकीदार चेतोडो ।
आलश मरोड़े उठे आंधलो ,
जटके सिर धरोना।
परदारन केवे राजपद्मि रे ,
जमले जानू माने।
दाऊ सिर सियारो थाने ,
आ पग पायल बाजनी थाने ,
आ सात मोजड़ी थाने
आ बात राखजो सानी गुरूजी रे।

सारो गहनों दियो रूपादे रे ,
मन में आंधला राजी।
रावल राखे तो घणो रेवाला ,
नही तो घर रा वाशी।
रूपादे ने केवे राज रुखलो रे ,
इतरो सुनेनी रूपा हालिया रे ,
घर धारू रे आया।
निवन प्रणाम गुरूजी ने कीजो ,
संतो ने सीस निवाया।
उगमजी केवे सुंनो संतो रे ,
सगला हिलमिल आवो।
थी पाठ अलख रो पुरावो ,
पिरारा पगला मंडावो।
जमला री ज्योत जगावो।
थी जमला री रात जगावो गुरूजी रे।

ढोलक मंजीरा वीणा वाजिया रे ,
कोने भजन सुनोना।
चेतन हो चंद्रावल जागी ,
ध्यान धरिया चेलाना।
चंद्रावल केवे रावलजी ने रे ,
रावल माल चंद्रावल रांनी रे ,
रूपा रे महल हलोना।
कर दीपक में महल संजोयो ,
माय वाचक भपकोना।
रावलजी खेसे पालक पसेडो ,
शेषनाग सेडोना।
रूपादे नही देखोना ,
रावजी रिस करोना ,
चंद्रावल मन हसोना ,
रूपा रा देवे सेलोना गुरूजी रे।

रावलमालजी घोडे चढ़िया रे ,
मन में रिष करोना।
साथे तो सालरिया ने लीणो ,
घर धारू रे जाना।
सालरिया ने पूछे रावलमालजी रे ,
केवे सालरियो सुनो मालजी ,
थितो उबा रहिजो।
मैं तो जाऊ रखियो रे द्वारे ,
थोड़ी जेज थी कीजो।
सालरियो जावे घर धारू रे ,
जाए बारने होरे।
रूपा री मोजड़ी जोवे ,
ओ सोने मोजड़ी लेवे ,
जाए रावल ने देवे ,
जमला री वाता केवे गुरूजी रे।

ज्योत दीवा री धीमी पड़ी रे ,
उगमजी अचरज कीनो।
नुगरो मानस आयो जमले ,
ज्योत बूजवा लागी।
उगमजी केवे सूना रितधारु रे ,
बाहऱे आयने देखे धारू रे ,
रूपा री मोजड़ी कोणी।
वीणा तंदुरा लीना हाथ में रे ,
अलख अराधे किणी।
उगमजी जोड़े हाथ अलख ने रे,
मैहर बाबा री होवे।
रूपा री मोजड़ी आई ,
रूपा री लाज बचाई ,
रूपादे मन हर्षाई ,
गुरु देव री कृपा पाई गुरूजी रे।।

सत री संगत सु चालिया रूपादे रे ,
जावे महला सामी।
सामी मिलिया रावलमालजी ,
रानी कटासु आया।
रावलजी पूछे राजपद्मानी ने ,
मैं तो गई थी बाग़ बगीचे रे ,
फुलड़ा लेवन सारू।
लाइ आपरे फूल गुलाबी ,
म्हारे हाथ रो गजरों।
रावलजी ने केवे राजपद्मानी रे ,
रावलजी केवे सुंनो रूपादे ,
थितो झूठ मत बोलो।
थितो साची बाता बोलो ,
थी राज हिया रा,खोलो ,
म्हारा सु मुखड़े बोलो,
दिलड़ा रो भेद खोलो गुरूजी रे।

केवे रावलजी सुंनो रूपादे रे ,
साची बात बतावो।
नेडा नही है बाग़ बगीचा ,
फूल कटासु लावो।
रावलजी केवे राजपद्मानी ने रे ,
पहली वाड़ी कहिजे मेड़ते रे ,
दूजी जेसाने माहि।
तीजी वाड़ी शिव वाड़ी है ,
चौथी अमरकोट जानू।
रावलजी ने केवे सुनो रूपादे रे ,
अब थी साचा बोलो।
थी अतरो झूठ मत बोलो ,
थी राज हिया रा खोलो ,
म्हारा सु मुखड़े बोलो ,
थी फुलड़ा रो भेद खोलो गुरूजी रे।

करे गुरु ने याद रूपादे रे ,
अब म्हारी लाज बचावो।
थालिसु ओसार हटाओ ,
थाली में बाग़ लगायो।
रूपा पे गुरूजी री मेहर भई रे ,
केवे रावलजी सुनो रूपादे रे ,
बाग़ कठासु आयो।
ऐडा कुन है गुरु तुम्हारा
थाली माय बाग़ लगायो।
रावलजी पूछे पंथ रूपा रो रे ,
रावलजी ने रूपा पन्थ वतावे ,
गुरु शरण में हालो।
थे डोर धर्म री जालो ,
भक्ति रो मार्ग जानो ,
गुरु वचना में हालो ,
थी जद अमरापुर मानो गुरूजी रे।।

kishore paliwal bhajan

धर धारू रे पाँव धराणा रे भजन, Dhar Dharu Re Paav Dharana baba ramdev ji bhajan lyrics in hindi
धर धारू रे पाँव धराणा रे बाबा रामदेव जी भजन
भजन :- धर धारू रे पाँव धराणा
गायक :- किशोर पालीवाल

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