प्रेमी हूँ मैं साँवरिये का श्याम नाम ही गाता हूँ लिरिक्स

प्रेमी हूँ मैं साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ,
हर ग्यारस पर खाटू आकर,
दर्शन तेरा पाता हूँ,
प्रेमी हूं मै साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ।।

दुनिया मुझको पागल समझे,
सुनकर मैं इतरता हूँ,
सांवरिया की शरण में आकर,
फूला नही समाता हूँ,
तेरी कृपा से ही बाबा,
घर परिवार चलता हूँ,
प्रेमी हूं मै साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ।।

नरसी भी पागल था तेरा,
जिसने टेर लगाई थी,
भात भरा नानी का तूने,
पल ना देर लगाई थी,
मीरा भी थी तेरी दीवानी,
सबको ये बतलता हूँ,
प्रेमी हूं मै साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ।।

हार के आता शरण जो तेरी,
उसको तू अपनाता है,
मेट के दुखड़े प्रेमी के तू,
उसको गले लगता है,
मैं भी हूँ चरणों का सेवक,
हाज़री रोज बजाता हूँ,
प्रेमी हूं मै साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ।।

प्रेमी तेरा मुझको बाबा,
कही नज़र आ जाता है,
उससे मिलकर लगता मुझको,
जन्मो का ये नाता है,
रहे मेहर ‘गोपाल’ पे तेरी,
‘सचिन’ की अर्जी लगाता हूँ,
प्रेमी हूं मै साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ।।

प्रेमी हूँ मैं साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ,
हर ग्यारस पर खाटू आकर,
दर्शन तेरा पाता हूँ,
प्रेमी हूं मै साँवरिये का,
श्याम नाम ही गाता हूँ।।

कृष्ण भजन प्रेमी हूँ मैं साँवरिये का श्याम नाम ही गाता हूँ लिरिक्स
तर्ज – मैं हूँ तेरा नौकर बाबा।

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