बात लेखों मैं हमने पढ़ी है भजन लिरिक्स

दो. चार वेद छः ास्त्र में बात िखी है एक
प्रेम करो हर जीव से प्रेम है सबसे नेक।।

बात लेखों मैं हमने पढ़ी है,
प्रभु की भक्ति में शक्ति बड़ी है।
अच्छे काम में प्रभु जी के नाम मैं,
हमेशा मुसीबत खड़ी है।।

(1) सतयुग में हरिश्चन्द्र दानी,
बेटा रोहित और तारा रानी।
पहुंचे काशी में जाकर देखो,
सत की खातिर बिके तीनों प्राणी।।
सत की नौका कभी ना अड़ी है….

(2) त्रेता में वो गौतम की नारी,
देखो अहिल्या बिचारी।
पत्थर बन के पड़ी थी डगर में,
पग रज से प्रभु ने है तारी।।
नारी बनके चरण पड़ी है…..

(3) द्वापर में विदुर भक्त भाये,
श्याम उनकी कुटिया पर आये।
विदुराणी के प्रेम बन्धन से,
केला के छिलका प्रभु ने है खाये।।
भाव भक्ति की जोरों लड़ी है….

(4) नाम कलियुग में आधार होगा,
भाव से लेके नर पार होगा।
बिन भाव के कुछ भी नहीं है,
भाव ही बस एक सार होगा।।
परषोत्तम परीक्षा कड़ी है…

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