बिगड़ी कौन सुधारे नाथ बिना भजन लिरिक्स

॥ दोहा ।॥
दौड़ सके तो दौड़ ले, जब तक तेरी दौड़।
दौड़ थकी धोखा मिट्या ,वस्तु ठोड की ठोड।

बिगड़ी कौन सुधारे रे ,
बिगड़ी कौन बनावे रे ।
बिगड़ी कौन बनावे नाथ बिन ,
बिगड़ी कौन बनावे रे ।।

बिगड़ी सुधरी दोनों कहिये रे ,
परा परी तूं आई रे ।
एक दफे रावण की बिगड़ी ,
लंक विभीषण पाई रे ॥
बिगड़ी कौन। …

बनी बनी के सब कोई साथी ,
बिगड़ी का कोई नाँहि रे ।
भरी सभा में लज्या राखी ,
दीनानाथ गुंसाई रे ।।
बिगड़ी कौन। …

कड़वी बेल की कड़वी तुंबड़ियाँ रे ,
सब तीरथ कर आई रे ।
घाट घाट को जळ भर लाई ,
अजहुं न गई कड़वाई रे ॥
बिगड़ी कौन। …

कुआ में कबूतर बोले ,
वन में बोले मोरा रे ।
नदी किनारे सारस बोले ,
मैं जानूं पिव मोरा रे ।
बिगड़ी कौन। …

नेम धर्म री जहाज बणाई ,
समन्द बीच तिराई रे ।
धरमी धरमी पार उतरिया ,
पापी नाव डुबाई रे ॥
बिगड़ी कौन। …

पाँच तत्व की बणी चुनड़िया ,
चुनड़ी के दाग लगायो रे ।
नाथ जालन्धर गुरु हमारे ,
राजा मान यश गायो रे ॥
बिगड़ी कौन। …

ओम वैष्णव के भजन video

बिगड़ी कौन सुधारे नाथ बिना || bigdi kon sudhare marwadi desi bhajan मारवाड़ी देसी भजन
भजन :- बिगड़ी कौन सुधारे रे
गायक :- ओम वैष्णव

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