भगता में मस्ती छाई रूत बाबे सु मिलण री आई

भगता में मस्ती छाई,
रूत बाबे सु मिलण री आई,
नगाड़ा-2 बाजन लाग्या ऐ,
जयकारा गुंजण लाग्या ऐ,
म्हारा जाग्या पूर्वला भाग,
बुलावो बाबे रो आयो रे।।

बित गई सावण री रिमझिम,
आई भादुऐ री बेला,
कोढ़ लाग्यो रूणेचे जावण रो,
चाल्या संग रंगीला,
धजा पचरंगी सजाई ऐ,
जय बाबे री बुलाई ऐ,
मैं तो जाणो पैदलिया संग,
बुलावो बाबे रो आयो रे।।

बैठ बाबे र सामी मैं तो,
हरदम शुक्र मनाऊ,
इतरी रहमत धणी री म्हापे,
किया बोल सुणाऊ,
भुल सगले ही जमाने ने,
नैणा रमाऊ बाबे ने,
हर सांस रटू बारों नाम,
बुलावो बाबे रो आयो रे।।

‘मनोज इंदौरा’ दर्श बाबे रा,
बिगड़ता काम बणावे,
राख भरोसो जो आवे द्वारे,
मु माग्यों हो पावे,
राजू मनालै बाबा ने,
सितारो फिर चमके जमाने में,
तु भी चाल धणी ये द्वार,
बुलावो बाबे रो आयो रे।।

भगता में मस्ती छाई,
रूत बाबे सु मिलण री आई,
नगाड़ा-2 बाजन लाग्या ऐ,
जयकारा गुंजण लाग्या ऐ,
म्हारा जाग्या पूर्वला भाग,
बुलावो बाबे रो आयो रे।।

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