मत बांधो गठरिया अपयश की भजन लिरिक्स

मत बांधो गठरिया अपय की,
अपयश रे पराये जस की,
मत बांधो गठरिया अपयश की

बापणो हस खेल गवायो,
बीती उमरिया दिन दस की,
मत बांधो गठरिया अपयश की।।

यम का दूत मुकदरा मारे,
आटी निकाले थारी नस नस की,
मत बांधो गठरिया अपयश की।।

मात पिता से मुख से न बोले,
तिरया से बाता करे घट घट की,
मत बांधो गठरिया अपयश की।।

कहत कबीरा सुनो रे संता,
या दुनिया हे मतलब की,
मत बांधो गठरिया अपयश की।।

मत बांधो गठरिया अपयश की,
अपयश रे पराये जस की,
मत बांधो गठरिया अपयश की।।

राजस्थानी भजन मत बांधो गठरिया अपयश की भजन लिरिक्स

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