मन नि रंगाया रंगाया कपड़ा कबीर भजन लिरिक्स

मन नि रंगाया रंगाया कपड़ा,
हो जोगी मन नी रंगाया रंगाया कपड़ा,
रंगाया कपड़ा हो रंगाया कपड़ा।।

हा जाय जंगल जोगी,
धुणी रमाई रे हा,
हा राख लगाई ने,
होया गदडा,
हा राख लगाई ने,
होया गदडा,
जोगी मन नी रंगाया रंगाया कपड़ा,
रंगाया कपड़ा हो रंगाया कपड़ा।।

हा जाय जंगल जोगी,
जटा बढाई रे हा,
हा दाढ़ी रखाई ने होया बकरा,
हा दाढ़ी रखाई ने होया बकरा,
जोगी मन नी रंगाया रंगाया कपड़ा,
रंगाया कपड़ा हो रंगाया कपड़ा।।

हा जाई जंगल जोगी,
गुफा बणाई रे हा,
हा गुफा बणाई ने होया उदंरा,
हा गुफा बणाई ने होया उदंरा,
जोगी मन नी रंगाया रंगाया कपड़ा,
रंगाया कपड़ा हो रंगाया कपड़ा।।

हा दुध पिवेगा जोगी,
बालक बछुवा रे हा,
हा काम जलाई ने होया हिजड़ा,
हा काम जलाई ने होया हिजड़ा,
जोगी मन नी रंगाया रंगाया कपड़ा,
रंगाया कपड़ा हो रंगाया कपड़ा।।

हा कहे कबीर सुणो,
भाई साधो रे हा,
हा जम के द्वारे मचाया झगड़ा,
जोगी मन नी रंगाया रंगाया कपड़ा,
रंगाया कपड़ा हो रंगाया कपड़ा।।

मन नि रंगाया रंगाया कपड़ा,
हो जोगी मन नी रंगाया रंगाया कपड़ा,
रंगाया कपड़ा हो रंगाया कपड़ा।।

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