मन रे ऐसा सतगुरु जोई भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
मन पापी मन पारधी, मन चंचळ मन चोर।
मन कै मतै न चालियै, पलक-पलक मन और।।

भक्ति योग ने ज्ञान वैरागा ,
शिलवान निर्मोई।
मन रे ऐडा सतगुरु जोई।

पर उपकर सदा हित कारण ,
आया जग रे माई !
दे उपदेश दया कर दाता ,
जन्म मरण दुख धोई ।
मन रे ऐडा सतगुरु जोई।
भक्ति योग ….

देह अभिमान भेख रो बड़पंन ,
रज मात्र ना होई ।
सम द्रिष्टि सारो पर देखे ,
क्या मित्र क्या द्रोही।
मन रे ऐडा सतगुरु जोई।
भक्ति योग ….

पर निन्दा स्तुति दोनो ,
हरक शौक ना होई।
दीन दयाल दया रो सागर ,
ज्ञान गुरो से होई।
मन रे ऐडा सतगुरु जोई।
भक्ति योग ….

कहे कबीर सन्त है विरला ,
लादे जग रे माई।
आप तरे ओरो ने तारे ,
मैल जूगा रो धोई।
मन रे ऐडा सतगुरु जोई।
भक्ति योग ….

रामनिवास राव भजन | ram niwas rao bhajan video

मन रे ऐसा सतगुरु जोई man re aisa satguru joi bhajan रामनिवास राव भजन सतगुरु भजन लिरिक्स इन हिंदी
भजन :- मन रे ऐड़ा सतगुरु जोई
गायक :- रामनिवास राव

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