माँयलो जाणे अमर मारी काया भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
राम भजले प्राणियाँ , कर – कर मन में सोच ।
बार बार नहीं आवसी , आ मिनख जनम री मौज ।

माँयलो जाणे रे ,
अमर म्हारी काया जी।
लोभीडो जाणे रे ,
सुन्दर म्हारी काया ।
धन रे जोबन ,
बादळ वाळी छाया जी ।
थोड़ा जीणा खातिर ,
काँई जोड़े माया ॥

लोहा री जंजीर ,
जकड़ बंधिया हाथी जी ।
अन्त समय में थारो ,
कोई नहीं साथी ॥
माँयलो जाणे रे । …….

सोना हन्दा महल ,
रूपा हन्दा साजा जी ।
राज करे वो ,
काया नगरी रो राजा ।
माँयलो जाणे रे । …….

धंस गयो महल ,
बिखर गया साजा जी ।
बिलख्यो फिरे रे ,
काया नगरी रो राजा ॥
माँयलो जाणे रे । …….

जळ की तो भीत ,
पवन की टाटी जी।
उड़ गया हंस ,
पड़ी रहगी माटी ॥
माँयलो जाणे रे । …….

एक कुओ ने ,
पाँच पणिहारी जी ।
एक रे नेजु से ,
भरे न्यारी – न्यारी ।।
माँयलो जाणे रे । …….

जल बिच जमुना ,
ऊपर बसे काशी जी।
वहाँ पर राज करे ,
अविनाशी ॥
माँयलो जाणे रे । …….

सूख गया नीर ,
सूखण लागी क्यारी जी ।
बिलखी फिरे रे ,
एतो पाँचू पणिहारी ।
माँयलो जाणे रे । …….

सीताफल रूंख ,
शीतल प्यारी छाया जी।
बाई रे रूपांदे ,
हरी रा जश गाया ।
माँयलो जाणे रे ,
अमर म्हारी काया , जी ।
माँयलो जाणे रे । …….

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भजन :- माँयलो जाणे रे अमर
गायक:- प्रकाश माली

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