माने बुद्धि दो महाराज गजानंद भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
विगन हरण मंगल करण ,लम्बोदर गणराज।
रिध्धि सिद्धि लेन पधारजो ,पूरण करजो काज।

~ माने बुद्धि दीजो महाराज ~

माने बुद्धि दीजो महाराज ,
गजानंद गौरी के नंदा।
ओ गौरी के नंदा ,
गजानंद गौरी के नंदा। २

पिता तुम्हारे शिव शंकर है ,
मस्तक पे चन्दा।
माता तुम्हारी पार्वती माँ,
जाणे जगत बंदा । २
माने बुद्धि दीजो महाराज ,
गजानंद गौरी के नंदा।
ओ गौरी के नंदा ,
गजानंद गौरी के नंदा। २

मूसक वाहन दुंद दुंदाला ,
पर साहस लेता।
ओजी गले पेजंती ,माला बिराजे ,
चढ़े पुष्प चन्दा। २
माने बुद्धि दीजो महाराज ,
गजानंद गौरी के नंदा।
ओ गौरी के नंदा ,
गजानंद गौरी के नंदा। २

जो नर तुमको नहीं सीवरता ,
उसका भाग मंदा।
जो नर तेरी करे सेवना ,
चले रे जग धन्धा। २
माने बुद्धि दीजो महाराज ,
गजानंद गौरी के नंदा।
ओ गौरी के नंदा ,
गजानंद गौरी के नंदा। २

विगण हरण मंगल करण ,
विद्या वर देना।
कहता कालू राम भजन से कटे रे,
पाप फन्दा। २
माने बुद्धि दीजो महाराज ,
गजानंद गौरी के नंदा।
ओ गौरी के नंदा ,
गजानंद गौरी के नंदा। २

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