मालिक लेखा पूरा लेसी भजन लिरिक्स

। दोहा ।।
वीगन हरण मंग करण ,और होत बुद्धि प्रका
प्रथम गणपति को सुमरिये ,होत दुखी का नाश।।

मालिक लेखा पूरा लेसी ,
फर्क चले ना राई का।
मनक जमारो युही मत खोवे ,
करले काम भलाई का।
मालिक लेखा। ….

गर्भवास में कोल किया था ,
नाम लिया भगताई का।
बाहर आके भूल गया तू ,
रोक्या ना जाल ठगाई का।
मालिक लेखा। ….

मारे जीव दया नहीं आवे ,
कर रहा काम कसाई का।
कर्ज ने देखो कैया चुकासी ,
रस्ता लिया बुराई का।
मालिक लेखा। ….

भीतर बाहर करेगा झगड़ा ,
जोर चले ना राई का।
अंत समय तेरी पोल खुलेगी ,
देख मजा चपटाई का।
मालिक लेखा। ….

रात अँधेरी अलगा जाना ,
उचा पहाड़ चढाई का।
गेला खर्ची सागे लेलो ,
मारग है गरड़ाई का।
मालिक लेखा। ….

राम दास गुरु पूरा मिलिया ,
हरी का भक्त सदाई का।
चंद्र प्रकाश यु कथ गावे ,
नाम रटो रघुराई का।
मालिक लेखा। ….

मालिक लेखा पूरा लेसी ,
फर्क चले ना राई का।
मनक जमारो युही मत खोवे ,
करले काम भलाई का।

मालिक लेखा पूरा लेसी भजन लिरिक्स malik lekha pura lesi fark chale na rai ka sanwarmal saini bhajan

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