मूल महल में बसे गजानंद भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
वक्रतुण्ड महाकाय , सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु में देव , सर्वकार्येषु सर्वदा।

मूल महल में बसे गजानंद ,
नित उठ दर्शन पाता ,गणपति दाता।
गुरु खोलो हृदय रा ताला ,
गुरु मेटो मन रा धोखा ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।।

पिता कहिजे शंकर देवा ,
गवरी तुम्हारी माता गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।
गुरु खोलो हृदय रा ताला ,
गुरु मेटो मन रा धोखा ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।

काँधे मूंज जनेउ सोहे ,
गले फूलो री माला ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।
गुरु खोलो हृदय रा ताला ,
गुरु मेटो मन रा धोखा ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।

चार लाडू थारे सूंड पे चढ़ाऊ ,
पान सुपारी रास लेता ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।
गुरु खोलो हृदय रा ताला ,
गुरु मेटो मन रा धोखा ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।

ठुमक ठुमक कर गणपत नाचे,
डाके ताल बजाता ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।
गुरु खोलो हृदय रा ताला ,
गुरु मेटो मन रा धोखा ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।

कहे कबीर सुनो भाई संतो ,
गुरु मिलिया सुख पाता ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।
गुरु खोलो हृदय रा ताला ,
गुरु मेटो मन रा धोखा ,गणपति दाता।
गुरुदाता हो जी।

गणपति जी भजन video

मूल महल में बसे गजानंद mul mahal me base gajanand bhajan of ganesh ji गणपति जी भजन
गणेश जी के भजन लिखे हुए
भजन :- मूल महल में बसे गजानंद
गायक :- धर्मेंद्र चारभुजा

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