मेरे मन में लग रही आश भजन लिरिक्स

मेरे मन में लग रही आश,
सतसंग में जाऊँ जुर मिल के।

(1) गाँव-गाँव सतसंग की मैं चर्चा सुन रही भारी।
हरि भक्ति में डुबकी मारूँ, इच्छा यही है हमारी।।
सतसंग में जाऊँ जुर मिल के

(2) सतसंग की गंगा वहे जामें बिरला ही कोई नहाय।
भाव उमड़ रहा मेरे मन में जनम सफल है जाय ।।।
सतसंग में जाऊँ जुर मिल के

(3) भाव कुभाव भजो तुम ईश्वर तो मुक्ति मिल जाय।
संत समागम होय वहाँ पर जनम सफल है जाय।।
सतसंग में जाऊँ जुर मिल के

(4) सतसंग की चर्चा सुनकर मुझसे रहा न जाय।।
महावीर को शौक लगा है नित सतसंग में जाय।।
सतसंग में जाऊँ जुर मिल के

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