मे थाने सिवरू गजानंद देवा भजन लिरिक्स

।।दोहा।।
वीगन हरण मंगल करण ,लंबोदर गणराज।
रिद्धि सिद्धि सहित पधारो ,पूरण करज्यो काज।।

में थाने सिमरु गजानंद देवा ,
वचनो रा पालण हारिया जी। ओ
सरस्वती माता सारदा ने सिमरु,
ह्र्दय करो उजियाला जी। ओ
निंद्रा निवारू भोले नाथ ने।
में थाने सिमरु। …..

जननी ने जायो रे उतर नहीं आयो ,
गवरा रो लाल कहायो जी। ओ
में थाने सिमरु। …..

पाणी सु पतलो पवन सु जीणो ,
सोभा वरणी नी जावे जी। ओ
में थाने सिमरु। …..

हाथ पसारु हीरो हाथ नहीं आवे ,
नैनो में नहीं रे समावे जी। ओ
में थाने सिमरु। …..

बोलिया गोरख जस मछन्द्र रा चेला ,
पथ पलभर भेली राखो जी। ओ
में थाने सिमरु। …..

में थाने सिमरु गजानंद देवा ,
वचनो रा पालण हारिया जी। ओ
सरस्वती माता सारदा ने सिमरु,
ह्र्दय करो उजियाला जी। ओ
निंद्रा निवारू भोले नाथ ने।
में थाने सिमरु। …..

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