मैं पतंग हूँ प्यारे तेरे हाथ है मेरी डोर भजन लिरिक्स

मैं पतंग हूँ प्यारे,
तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर,
एक चले ना बाबा,
तेरे आगे मेरा जोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर,
मै पतंग हूँ प्यारे,
तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर।।

तू श्याम बाबा मेरा,
तू ही मेरी मैया,
थाम के कलाई चलना,
धुप हो या छईया,
देख के तुझको सोऊ,
तेरे भजन से जागे भोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर।

मै पतंग हूँ प्यारे,
तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर।।

जीत भी कबुल मुझे,
हार भी कबुल है,
प्यार तेरे फूलो से भी,
हार भी कबुल है,
जीत के ना इतराऊ,
हारूँ तो करूँ ना शोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर।

मै पतंग हूँ प्यारे,
तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर।।

करूँ मैं गुलामी तेरी,
यही मेरा ख्वाब है,
अाजमा के देख ये,
गुलाम लाजवाब है,
तू जो कहे तो नाचू,
तेरे आगे बनके मोर,
तेरी ख़ुशी की खातिर,
बन जाऊ माखन चोर।

मै पतंग हूँ बाबा,
तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर।।

मैं पतंग हूँ प्यारे,
तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर,
एक चले ना बाबा,
तेरे आगे मेरा जोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर,
मै पतंग हूँ प्यारे,
तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हूँ तेरी मर्जी पे,
नचाले जिस ओर।।

कृष्ण भजन मैं पतंग हूँ प्यारे तेरे हाथ है मेरी डोर भजन लिरिक्स
तर्ज – सावन का महीना।

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