मोहन खेड़ा के प्रांगण में भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
सो सो चंदा उगवे , सूरज तपे हजार।
इतरा चानण होत भी , गुरु बिन घोर अंधार।

मोहन खेड़ा के प्रांगण में ,
गूंजे जय जय कार।
आपकी जय होवे ,
आपकी जय होवे।

राजेंद्र सूरी जी का धाम निराला ,
दर्शन करने आये किस्मत वाला।
ऊंचा है दरबार लोक में ,
महिमा अपरम्पार ,
आपकी जय होवे। टेर।

विभूति है संघ नायक ,
पर उपकारी है सुखदायक।
युग में एक दातार आप हो ,
भक्तो के आधार ,
आपकी जय होवे। टेर।

जैन आगम के आप प्रज्ञाता ,
ज्योतिष विद्या के तुम ज्ञाता।
पाये नहीं कोई पार आपको ,
पूजे जग संसार ,
आपकी जय होवे। टेर।

मोहनखेड़ा है अति पावन ,
धाम आपका है मन भावन।
ध्यावे नित नर नार वंदना ,
करते बारम्बार ,
आपकी जय होवे। टेर।

दास अशोक यु अरज सुनावे ,
प्रभु चरणों में शीश नवावे।
नाव मेरी मझधार गुरुवर ,
कर दो भव सु पार ,
आपकी जय होवे। टेर।

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मोहन खेड़ा के प्रांगण में
भजन :- मोहन खेड़ा के प्रांगण में
गायक :- बंसी बहार

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