संता री संगत सायरा बड़भागी नर पावे भजन लिरिक्स

संता की संगत सायरा ,
कोई बड़भागी नर पावे।

सत्संग सार अनके पलड़ी ,
साथी दूध गुण चार।
केल कपूर सिप संग मोती ,
भुजंग विष की धार।
बगिया की प्यास बुझावे ,
कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

पत्थर सुधरे पानी के संग ,
पारस के संग लोहा।
सुवाग संग में सोना सुधरे ,
तपा छान कर लोहा।
गंगा संग पाप समावे ,
कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

नदिया में मिल नाडो सुधरे ,
समंदा जाय समावे।
भवरा के संग कीड़ो सुधरे ,
पंख आय उड़ जावे।
बागा की सफर करावे ,
कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

बिन संगत उपजे नहीं बुद्धि ,
भक्ति ज्ञान बेराग।
कुणी जना में मुर्ख बैठा ,
ज्यू हंसा बिच काग।
मने रागद्वेष नहीं भावे ,
कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

भैरव ले संता को सरणो ,
पावे राम रस घोल।
पानी मिल ग्यो दूध के संग में ,
बन ग्यो उचो मोल।
वाने दूध के भाव बिकावे ,
कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

संता की संगत सायरा ,
कोई बड़भागी नर पावे।

संता री संगत सायरा बड़भागी नर पावे भजन लिरिक्स santa ri sangat sayra koi badbhagi nar pave jagdish vaishnav bhajan Lyrics

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