संदेसा आ गया यम का चलन की कर तैयारी है भजन लिरिक्स

संदेसा आ गया यम का,
चलन की कर तैयारी है।।

बाल सिर के हुए धोले,
सफेदी आँख पर छाई,
कान से हो गया बेहरा,
दाँत हिलना भी जारी है,
संदेसा आ गया जम का,
चलन की कर तैयारी है।।

कमर सब हो गई कुबड़ी,
चले लकड़ी सहारे से,
गई सब देह की ताकत,
लगी तन में बीमारी है,
संदेसा आ गया जम का,
चलन की कर तैयारी है।।

छुटी सब प्रीत तिरिया की,
पुत्र सब हो गये न्यारे,
बने सब मतलब के साथी,
झूठ लोकन की यारी है,
संदेसा आ गया जम का,
चलन की कर तैयारी है।।

करो जगदीश का सुमिरण,
भरोसा राख कर मन में,
वो ब्रह्मानन्द है तेरा,
एक ही सहायकारी है,
संदेसा आ गया जम का,
चलन की कर तैयारी है।।

संदेसा आ गया यम का,
चलन की कर तैयारी है।।

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