सतसंग महिमा बड़ी अपार भजन लिरिक्स

सतसंग महिमा बड़ी अपार
आज मैं सुनने जाऊँगी।

(1) सतसंग मुक्ति देय दिलाई।
रहे ऋषिमुनी सब गाई।
सुख जायें वे सुम्बार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

(2) सत नाम एक ईश्वर को
बेडा पार होय जा नर कौ।।
यही है जीवन का आधार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

(3) रहे भक्त सभी ये गाई।
सतसंग से मानव तर जाई।
जाकौ है जाय बेड़ापार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

(4) तर जाओगे चिन्तन से।
अहंकार भगाओ मन से।
महावीर कर रहे काहे अवार, आज मैं सुनने जाऊँगी।।

मोय सतसंग सुनने का चाब भजन लिरिक्स
मोय सतसंग सुनने का चाब,
संग में ले चल साँवरिया।

(1) जगह-जगह सतसंग है रहे दिल में उठे उमंग।
मन में भाव उमड़ रहा मेरे चलूँ तुम्हारे संग।
मोय सतसंग सुनने का चाब

(2) ब्रह्मा, विष्णु, महेश तक सतसंग में रहे आय।
साथ तुम्हारे चलूँगी मेरो मन ललचाय।
मोय सतसंग सुनने का चाब

(3) सत्य नाम एक ईश्वर का है और सब है बेकार।
भव सागर से मैं तर जाऊँ है जाय बेड़ा पार।
मोय सतसंग सुनने का चाब

(4) वेदन में सतसंग की महिमा लिख गये संत अपार।
महावीर जो जाऔ सतसंग में मैं चल दऊँ पिछार।
मोय सतसंग सुनने का चाब

Leave a Reply