सत्संग अमर जड़ी भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
सतगुरु मारा बाणिया , बिणज करे व्यापार।
बिन दांडी बिन ताकड़ी , गुरु तोल दिया संसार।

सतसंगत अमर झड़ी है ,
सतसंगत अमर झड़ी है ।
ज्याने लाभ मिळियो सतसंग में ,
उनको खबर पड़ी है ।
सतसंगत अमर झड़ी है ।

प्रहलादे संगत सिरिया देरी कीनी ,
रामजी री खबर पड़ी है ।
हिरणाकुश ने थम्भ तपायो ,
थम्भ से बाथ भरी है ।
सतसंगत अमर। ….

नरसी रे संगत पीपा जीरी कीनी ,
सुई पर बात अड़ी है ।
छप्पन करोड रो भरियो मायरो ,
आया ए आपहरी है ।
सतसंगत अमर। ….

रामजी संगत सुग्रीव री कीनी ,
वानरों री फौज बणी है ।
वानरों री काँहि सिमरथा ,
जाय रावण से लड़ी है ।
सतसंगत अमर। ….

लोहे संगत काठरी कीनी ,
भाई जलपर जहाज तिरी है ।
रामानन्द रा भणे कबीरा ,
बिल्कुल बात खरी है ।
सतसंगत अमर। ….

prakash mali bhajan rajasthani Video

सत्संग अमर जड़ी satsang amar jadi re, prakash mali bhajan rajasthani,chetawani bhajan lyrics
भजन :- सतसंगत अमर झड़ी है
गायक :- प्रकाश माली

Leave a Reply