समय को भरोसो कोनी कद पलटी मार जावे भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
समय समय में होत है ,और समय समय की बात।
एक समय का दिन बड़ा , एक समय की रात।।

कदी कदी गाडरा सु ,
सिंह हार जावे।
समय को भरोसो कोनी ,
कद पल्टी मार जावे। २

गुरु वसिष्ठ महा मुनि ज्ञानी ,
लिख लिख बात बतावे। २
श्री राम जंगल में जावे ,
किस्मत पलटी खावे।
राजा दशरथ प्राण त्याग दे।
हाथ लगा नहीं पावे। २
समय को भरोसो कोनी ,
कद पल्टी मार जावे। २

राजा हरीचंद रानी तारामती ,
रोहितास कवर कहावे।
ऐसो खेल रच्यो मेरे दाता ,
तीनो ही बिकबा जावे।
एक हरिजन एक ब्राह्मण घर ,
एक कुबदा घर जावे।
समय को भरोसो कोनी ,
कद पल्टी मार जावे। २

राजा की बेटी पदमा कहिये ,
मोर लार परनावे।
मोर जाय जंगल में मर गयो ,
किस्मत पलटी खावे।
मेर भई शिवजी की ऐसी ,
मोर को मर्द बनावे।
समय को भरोसो कोनी ,
कद पल्टी मार जावे। २

राजा भरतरी रानी पिंगला ,
मेहला में सुख पावे।
शिकार खेलने राजा भरतरी ,
जंगल माई जावे।
गोरखनाथ गुरु ऐसा मिलिया।
राजा जोगी बण जावे।
समय को भरोसो कोनी ,
कद पल्टी मार जावे। २

गुरु कह ममता की वाणी ,
अमृत रस बरसावे। २
मारो मनडो कयो नई माने ,
फिर फिर गोता खावे।
हरिदास गुरु मिलिया पूरा ,
राम दास जस गावे।
समय को भरोसो कोनी ,
कद पल्टी मार जावे। २

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