सावन की बरसे बदरिया भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
जय – जय जय माँ अष्टभवानी , थारी महिमा वेद बखाणी ।
तीन लोक में होवे थारी पूजा , ध्यानधरे सुर नर मुनि ज्ञानी ।

सावन की बरसे बदरिया ,
माँ की भीगे चुनरिया ।

लाल चोला मैया का ,
चम चम चमके ।
माथे की बिंदिया भी ,
दम – दम दमके ।
हाथों में चमके मुंदरिया ,
माँ की भीगे चुनरिया ॥
सावन की बरसे । ……

छायी हरियाली झूमे ,
अमवा की डाली ।
होके मतवारी कूके ,
कोयलिया काली ।
बादल में कड़के बिजुरिया ,
माँ की भीगे चुनरिया ।
सावन की बरसे । ……

ऊँचा भवन तेरा ,
ऊँचा है डेरा ।
कैसे चढ़ु पाँव ,
फिसले है मेरा ।
टेढ़ी – मेढ़ी है डगरिया ,
माँ की भीगे चुनरिया ।
सावन की बरसे । ……

काली घटा पानी ,
भर – भर के लाई ।
झूला झूले ,
मेरी वैष्णों माँई ।
हम सब पे तेरी नजरिया ,
माँ की भीगे चुनरिया ।
सावन की बरसे । ……

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