सुख दुःख में जो नर एक रहे भजन लिरिक्स

कवित्त

सुख दुःख में जो नर एक रहे,
वह भक्त मुझे अति प्यारा लगे।

सकाम को तज निष्काम भजे,
बसे हृदय में आँखों का तारालगे।

कर ध्यान सदा भक्तन हित की,
चाहे कष्ट का मुझे सहारा मिले।

महावीर हमेशा ध्यान रखू,
मेरे भक्त को मोझ का द्वारा मिले।

कवित्त

भक्ति ज्ञान वैराग्य की त्रिवैणी सतसंग।
सेवन इसका जो करे शुद्ध होय सब अंग।।

शुद्ध होय सब अंग कि भव से वह तरि जावै।
आवा गवन मिट जाय भक्ति रस जो अपनावै।।

मिले मोक्ष का द्वार मिटे सब झंझट सारे।
महावीर यों कहें जाओ नटवर के द्वारे।।

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