हंस लो मित्र कोनी थारो भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
लम्बा चौड़ा जल प्रबल , यहाँ समंद अपार।
मोती ओ हिज मानसर , हंसा पूरणहार।

हंसलो मित्र कोनी थारो ,
ए भोली काया।
तू जाणे काया में ठग राख्यो ,
यो हंसलो आप ठगोरो ।

अमर लोक से आयो म्हारो हंसलो ,
यो आयो अखंड कंवारो।
इ हंसले न ब्याह रचायो ,
यो ही है पिव तिहारो ।
ए भोली काया।
हंसलो मित्र ….

काढ रे ल्याई कढाय कर ल्याई ,
फिर फिर ल्याई रे उधारो।
इ हंसले न कदे न भूखो राख्यो ,
सूंप दियो घर सारों ।
ए भोली काया।
हंसलो मित्र ….

जळ गया तेल बुझ गयी बतिया ,
मन्दरिया में भयो अंधियारो।
ले दिवलो में घर घर डोली ,
मिल्यो कोनी तेल उधारो।
ए भोली काया।
हंसलो मित्र ….

दो दिन या चार दिन को पावणों ,
यो लाद चल्यो बिणजारो।
तू कहे हंसा संग चलूँगा ,
छोड़ चल्यो मझधारो।
ए भोली काया।
हंसलो मित्र ….

उड़ गया हंस या टूट गयी टाटी ,
माटी में मिल गयो गारो।
कहत कबीर सुणो भाई साधू ,
निकल गयो बोलण हारो।
ए भोळी काया।
हंसलो मित्र ….

vikash nath ji ke bhajan video

हंस लो मित्र कोनी थारो hanslo mitra koni tharo bhajan lyrics हंसला भजन लिरिक्स
हंसला भजन लिरिक्स in hindi
भजन :- हंसलो मित्र कोनी थारो
गायक :- विकास नाथ जी

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