हरी ने रूणीचो बसायो भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
श्री रामदेव रक्षा करो, हरो संकट संताप।
सुखकर्ता समरथ धणी, जपु निरंतर जाप।

हरी ने रूणीचो बसायो ,
प्रभु ने रुणीचो बसायो ,
द्वारिका से आय।

पगा उभाणा गया तिरथां ,
अन्न रति नहीं खायो।
जाय द्वारका में डेरा कीन्हा ,
प्रभु जी के आगे वेतो ,
तो रुदन मचायो रे।
द्वारिका से आय।
हरी ने …..

हाथ जोड़ अजमलजी बोल्या,
के में पाप कमायो ।
एक पुत्र जलम नहीं मेर ,
बैठ चरणा माहि बाँके ,
नीर बहायो रे।
द्वारिका से आय।
हरी ने …..

इतनी कह बड्या समदर में ,
सिंघासन थर्रायो।
जद मालिक ने दया उपजी ,
भाग्यो ही दोड्यो सांवरो ,
पलका में आयो रे।
द्वारिका से आय।
हरी ने …..

रतनागर में नीर घणों है ,
ठाकुर जी समझावे।
माथे ऊपर जल फिर जाज्यो ,
हटजा भगत रामा ,
हटजा हटायो रे।
द्वारिका से आय।
हरी ने …..

अजमल जी केणो नहीं माने ,
आगो आगो ध्यायो।
जद मालिक ने दया उपजी ,
चतुर्भुज रूप साँवरो ,
पल में दिखायो रे।
द्वारिका से आय।
हरी ने …..

भगत जाण के कारज सारया ,
वचना को बांध्यो आयो।
अजमल जी का जनम सुधारिया ,
ईश्वरदास अरठ रामा ,
भजन बनायो रे।
द्वारिका से आय।
हरी ने …..

रामदेवजी का भजन video

हरी ने रूणीचो बसायो hari ne runicho basayo बाबा रामदेव जी भजन लिरिक्स
बाबा रामदेव जी भजन लिरिक्स in hindi
भजन :- हरी न रूणीचो बसायो
गायक :- रतिनाथ जी महाराज

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