हाथ जोड़ने अरज करूं भजन लिरिक्स

॥ दोहा ॥
भादूडा री बीज ने , जद चन्दो करे प्रकाश ।
रामदेव बण आवसूं , थे राखीजो विशवास ।

हाथ जोड़ने अरज करूं मैं ,
आयो थारे बारणे ।
दुनियाँ म्हाने मेणां बोले ,
एक टाबर रे कारणे ॥

अजमल केवे सुण रे सांवरा ,
इतरो मत बण रे मुंजी ।
एक टाबरियो म्हाने देवे तो ,
नहीं घटे थारी पूँजी ॥
नहीं सुणेला , विघन करूंला ,
आयो घर सूंधारने ।।
दुनियाँ म्हाने मोसा बोले ,
एक टाबर रे कारणे ॥

पण्डो बोल्यो सुणो ठाकरां ,
मूरत सेथे काँई लड़ो ।
सांवरिया सं मिलणो वे तो ,
सागरिया में कूद पड़ो ।
इण सागर में पीपा जी ने ,
मिलिया चारभुज धार ने ,
दुनियाँ म्हाने मोसा बोले ,
एक टाबर रे कारणे ॥

इतरी बात सुणी अजमल ने ,
सागरिया में कूद पड्या ।
सोने रा तो महल देखिया ,
हीरा पन्ना सूं जड़िया ।
आय सांवरे दर्शण दीना ,
सिर पर पट्टी बाँधने ॥
दुनियाँ म्हाने मोसा बोले ,
एक टाबर रे कारणे ॥

चौदह सौ इकसठ माघ सुद ,
नयो चाँद जद ऊगेला ।
सुणजे अजमल थारे पालणे ,
दो दो टाबर झूलेला ।
पाणी रो तो दूध बणेला ,
कुंकुं पगल्या आँगणे ॥
दुनियाँ म्हाने मोसा बोले ,
एक टाबर रे कारणे ॥

अजमल घर अवतार लियो है ,
द्वारिका रा नाथ जी ।
भक्त मण्डली चरणों में बाबा ,
धरो शीश पर हाथ जी ।
बेगा आइजो न देर लगाइ जो ,
भक्तां रे हित कारणे ॥
दुनियाँम्हाने मोसा बोले ,
एक टाबर रे कारणे ॥

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