हे महारे बोल मुँडेरे प काग मन्नै हे लागै आज मेरे बालाजी आवेंगे

हे महारे बोल मुँडेरे प काग,
मन्नै हे लागै,
आज मेरे बालाजी आवेंगे।।

हे मन्नै हिंचकी आवं थी रात ने,
आज रोटी मुसः थी मेरे हाथ मेंं,
मैं तो इब समझी सुं राज,
मन्नै हे लागै,
आज मेरे बालाजी आवेंगे।।

हे महारः काग मुँडेरे प बोलता,
वो त आवण का राज खोलता,
वो त देवों के सरताज,
मन्नै हे लागै,
आज मेरे बालाजी आवेंगे।।

मेरे बालाजी दयावान हैं,
उने सब भक्तों का ध्यान है,
वो तो सबकी राखः स लाज,
मन्नै हे लागै,
आज मेरे बालाजी आवेंगे।।

अशोक भक्त नादान हस दिया,
बालाजी ने ज्ञान स,
सुण कौशिक जी का साज,
मन्नै हे लागै,
आज मेरे बालाजी आवेंगे।।

हे महारे बोल मुँडेरे प काग,
मन्नै हे लागै,
आज मेरे बालाजी आवेंगे।।

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