jagdish vaishnav bhajan Hindi Lyrics

संता की संगत सायरा ,कोई बड़भागी नर पावे।

सत्संग सार अनके पलड़ी ,साथी दूध गुण चार।
केल कपूर सिप संग मोती ,भुजंग विष की धार।
बगिया की प्यास बुझावे ,कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

पत्थर सुधरे पानी के संग ,पारस के संग लोहा।
सुवाग संग में सोना सुधरे ,तपा छान कर लोहा।
गंगा संग पाप समावे ,कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

नदिया में मिल नाडो सुधरे ,समंदा जाय समावे।
भवरा के संग कीड़ो सुधरे ,पंख आय उड़ जावे।
बागा की सफर करावे ,कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

बिन संगत उपजे नहीं बुद्धि ,भक्ति ज्ञान बेराग।
कुणी जना में मुर्ख बैठा ,ज्यू हंसा बिच काग।
मने रागद्वेष नहीं भावे ,कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

भैरव ले संता को सरणो ,पावे राम रस घोल।
पानी मिल ग्यो दूध के संग में ,बन ग्यो उचो मोल।
वाने दूध के भाव बिकावे ,कोई बड़भागी नर पावे।
संता की। ….

संता की संगत सायरा ,कोई बड़भागी नर पावे।

santa ri sangat sayra Bhajan Video
भजन :- संतो री संगत सायरा
गायक :- जगदीश वैष्णव

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